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समय के चक्र में
उथला पड़ा सर्वस्व
सीखचों में जकड़ा पड़ा
दम्भ भर कर जी रहा
मानुषिक धरातल पर नाचता
स्वयं को करता गुमराह
आज तक अपरिचित
नगण्यता का उद्भूत दृष्टांत
अबूझ पहेली-सा
टकराहट के परिणाम को
करता चित्रित
बेलौस जल रहा
है कौन ? स्वयं से पूछियेगा ???
_सत्येंद्र कात्यायन
27 .जून 2017

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