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https://youtu.be/5SIcSvmeedE
शब्द ब्रह्म नाम इसलिए कि शब्द ब्रह्म/ परम सत्ता का स्वरुप है . इनका समुचित प्रयोग किया जाना चाहिए. शब्दों की अवहेलना करना उचित नहीं ..व्यक्ति की पूर्णता में शब्दों का बड़ा महत्व है..यह कभी कविता के रूप में तो कभी गद्य के रूप में प्रस्फूट हुआ..आज भी ये रूप समय के साथ अपने आप में यथोचित परिवर्तन के साथ स्वयं को जीवित रखे है ...ये मेरे अन्तस् के भाव है .. सब को सबके भावो से जुड़ने का अधिकार है. भावों में ही भावों का वरण होता है ... # सत्येन्द्र कात्यायन
शब्दब्रह्म ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है। आइये, आज हिन्दी भाषा में पश्चिमी हिन्दी की बोलियाँ के विषय में सामान्य जानकारी लेते हैं। इसके लिए मैंने व्याकरणाचार्य कामताप्रसाद गुरू जी, डॉ. हरदेव बाहरी, डॉ. वासुदेवनंदन प्रसाद तथा डॉ. राघव प्रकाश जी की व्याकरण पुस्तकों का उपयोग किया है। आप इस ब्लॉग के माध्यम से आगे भी परीक्षापयोगी,ज्ञानोपयोगी तथा मेरी रचनाओं का आनंद लेते रहेंगे। आपको यह प्रयास कैसा लग रहा है?...कमेंट कर अवश्य बताइये। इस विषय पर सहजप्रवाह यू ट्यूब चैनल पर वीडियो भी अपलोड की गयी है। आप विडियों के माध्यम से भी सरलता से यह जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
सहज प्रवाह
संकलनकर्ता- सत्येन्द्र कात्यायन
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https://youtu.be/M_txJ7Q8f1A