नमोस्तुते माँ शारदे!
सभी साथियों को प्रणाम
आज समर्पित मन के भाव , ****
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कंगना
कंगना हो तो प्रीत जड़ा
मन को झंकृत कर दे
कंगना
कंगना हो तो स्वप्न सरीखा
मन को मन में भर दे
कंगना
कंगना हो तो स्वर स्वर में
राग रागिनी भर दे
कंगना
कंगना हो तो अंतरतम को
दीपक ज्योति कर दे
कंगना
कंगना हो तो घुमड़ घुमड़ते बादल
में बिजली भर दे
कंगना
कंगना हो तो अंग अंग को
रूमानी कर दे
कंगना
कंगना हो तो हिय की हिय से
उर की उर में
चमक दमक सब भर दे
कंगना
कंगना हो तो जल थल में
अंतर हिलोर सी भर दे
कंगना
कंगना हो तो वीणा के तारों में
संवेदी सरगम भर दे
कंगना
कंगना हो तो कोयल के स्वर को
मधुर मधुरतम कर दे
कंगना
कंगना हो तो प्रेम डगर पर
प्रीत दीवानी कर दे
कंगना
कंगना हो तो वंशी की धुन पे
कोई जवानी लिख दे
कंगना
कंगना हो तो राधा को मीरा
मीरा को राधा कर दे
कंगना
कंगना हो तो मीर के दर्द को
ग़ालिब के हवाले कर कर दे
कंगना
कंगना हो तो गोरी की कलाई में
यौवन सुख भर दे
कंगना
कंगना हो तो गीत ग़ज़ल सब
रल मिल गिद्दा पा ले
कंगना
कंगना हो तो अपनापे की
कोई इबारत लिख दे
कंगना
..
#सत्येंद्र कात्यायन🙏🙏🙏
