शब्द ब्रह्म नाम इसलिए कि शब्द ब्रह्म/ परम सत्ता का स्वरुप है . इनका समुचित प्रयोग किया जाना चाहिए. शब्दों की अवहेलना करना उचित नहीं ..व्यक्ति की पूर्णता में शब्दों का बड़ा महत्व है..यह कभी कविता के रूप में तो कभी गद्य के रूप में प्रस्फूट हुआ..आज भी ये रूप समय के साथ अपने आप में यथोचित परिवर्तन के साथ स्वयं को जीवित रखे है ...ये मेरे अन्तस् के भाव है .. सब को सबके भावो से जुड़ने का अधिकार है. भावों में ही भावों का वरण होता है ... # सत्येन्द्र कात्यायन
सोमवार, 30 जनवरी 2017
नज़र
नज़र पे कुछ भाव उमड़ आये ..👀 👀
👁 👁
नज़र नज़र से मिली
नज़र नज़र की बात थी
नज़र नज़र में खो गयी
नज़र नज़र की हो गयी
नज़र नज़र में डूबती
नज़र नज़र को चूमती
क्या खता नज़र ने की
नज़र में रौशनी का लुत्फ़
नज़र में सर्द धुंधलका
नज़र का लंबा फ़लसफ़ा
नज़र बहार औ' फ़िज़ा
नज़र की ये खुमारियां
नज़र नज़र में घुल गयी
नज़र नज़र चमक उठी
रौनको की झालरें
चमक उठा हृदय पटल
चमक उठा धरा गगन
चमक उठा शहर शहर
नगर नगर गांव गांव उठा चमक
चमक से झुक गयी नज़र
नज़र की लग गयी नज़र
🙏🙏✍🏻
सत्येंद्र कात्यायन
कुछ दोहे ...नेतन , जनता, वोट
टोपी का उपयोग अब, नेता की पहचान।
कुरता भी अब बन गया, नेता जी की शान।।
टोपी हाथी पर चढ़ी, कहीं साइकिल संग।
हाथ हिलाती चल रही, टोपी बनी दबंग।।
नेता मूरख बनाते, जनता को हर बार।
जान बावले बन रहे, देख वोट अधिकार।।
वादों की बातें चली, हाँ सपनों की बात।
दूर दूर पहुँच सपन, बस में रही न बात।।
मोटे मोटे पेट भी, दौड़ लगाते आज।
किस्से और कहानियां, निभा रही है साथ।।
लूटा जनता को बहुत, अब जनता की बार।
देर सबेर ना कीजिए, मत है एक हथियार।।
🇮🇳👆✍🏻सत्येंद्र कात्यायन
टोपी का उपयोग अब, नेता की पहचान।
कुरता भी अब बन गया, नेता जी की शान।।
टोपी हाथी पर चढ़ी, कहीं साइकिल संग।
हाथ हिलाती चल रही, टोपी बनी दबंग।।
नेता मूरख बनाते, जनता को हर बार।
जान बावले बन रहे, देख वोट अधिकार।।
वादों की बातें चली, हाँ सपनों की बात।
दूर दूर पहुँच सपन, बस में रही न बात।।
मोटे मोटे पेट भी, दौड़ लगाते आज।
किस्से और कहानियां, निभा रही है साथ।।
लूटा जनता को बहुत, अब जनता की बार।
देर सबेर ना कीजिए, मत है एक हथियार।।
🇮🇳👆✍🏻सत्येंद्र कात्यायन
शनिवार, 21 जनवरी 2017
कंगना
नमोस्तुते माँ शारदे!
सभी साथियों को प्रणाम
आज समर्पित मन के भाव , ****
***
कंगना
कंगना हो तो प्रीत जड़ा
मन को झंकृत कर दे
कंगना
कंगना हो तो स्वप्न सरीखा
मन को मन में भर दे
कंगना
कंगना हो तो स्वर स्वर में
राग रागिनी भर दे
कंगना
कंगना हो तो अंतरतम को
दीपक ज्योति कर दे
कंगना
कंगना हो तो घुमड़ घुमड़ते बादल
में बिजली भर दे
कंगना
कंगना हो तो अंग अंग को
रूमानी कर दे
कंगना
कंगना हो तो हिय की हिय से
उर की उर में
चमक दमक सब भर दे
कंगना
कंगना हो तो जल थल में
अंतर हिलोर सी भर दे
कंगना
कंगना हो तो वीणा के तारों में
संवेदी सरगम भर दे
कंगना
कंगना हो तो कोयल के स्वर को
मधुर मधुरतम कर दे
कंगना
कंगना हो तो प्रेम डगर पर
प्रीत दीवानी कर दे
कंगना
कंगना हो तो वंशी की धुन पे
कोई जवानी लिख दे
कंगना
कंगना हो तो राधा को मीरा
मीरा को राधा कर दे
कंगना
कंगना हो तो मीर के दर्द को
ग़ालिब के हवाले कर कर दे
कंगना
कंगना हो तो गोरी की कलाई में
यौवन सुख भर दे
कंगना
कंगना हो तो गीत ग़ज़ल सब
रल मिल गिद्दा पा ले
कंगना
कंगना हो तो अपनापे की
कोई इबारत लिख दे
कंगना
..
#सत्येंद्र कात्यायन🙏🙏🙏
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अकविता
https://youtu.be/M_txJ7Q8f1A




