शनिवार, 30 अप्रैल 2016

भड़ास....
आज गली मोहल्ले में समाज का संस्कारित रूप कहीं खो सा गया है , आज शब्दब्रहम के माध्यम से अपने मोहल्ले की इस बिगडती तस्वीर को सामने रखना चाहता हूँ जहाँ शरीफ लोगो का जीना तो मुश्किल हो ही चुका है वरन शुकून से सोने भी नहीं दिया जा रहा है . खतौली के सैनी नगर मोहेल्ले में चंद शराबी और मस्खरेबाज युवाओ की मण्डली आय दिन गली गलौच और शराब के नशे में धुत डीजे के शोरगुल में इतने मशगूल और आनंद में डूब जाते है की दूरे लोगो कीपरेशानी से उनका कोई वास्ता नहीं होता तब यदि कोई कुछ कहता भी है तो कुछ समय तो शांति पर कुछ मिनटों बाद वही सब कुछ. या फिर मरने मारने पर उतारूहो जाते है . बिलावजह ही इस प्रकार का कृत्य जहाँ परेशानी का सबब बनता है वहीँ दूसरी ओर बच्चो पर भी इन सब गतिविधियों का गलत असर पड़ता है . इन्हें पुलिस का खोफ नहीं है . कुछ तो ऐसे है जिनके बच्चे बड़े हो रहे है पर उनके कृत्य कहीं भी अनुकरणीय नहीं ..हम सब मोहोल्लों में ऐसे छोटे बड़े गुंडों से परेशां है और विरोध का कोई बड़ा नतीजा नहीं निकलता उल्टा नतीजा भुगतने की धमकियाँ जरूर मिल जाती है . और होता भी है गरीब और शरीफ सरे आम पिटता है ..तमाशा बनता है और फिर से सब कुछ दोहराया जाता है . ध्वनी प्रदूषण के साथ साथ ये अश्लीलता और नशेखोरी का वातावरण कहीं भीतर तक कचोटता है . क्या शरीफ को/ सभ्य लोगो को शांति से जीने का हक़ नहीं ? , उसे शुकं से , चैन से सोने का हक़ नहीं ..है..ऐसे मुहफट, शराबी गुंडे  इंटरनेशनल गलियों के प्रणेता इस देश के हर मुहल्ले में कम या ज्यादा मात्रा में है. ध्वनी प्रदुषण और शराब और शांति भंग को लेकर कानून बना है पर  ये कानून बस कानून है ..इन पर अमल कितना हुआ है सब जानते है . .लगता है ये कानून से ऊपर है .ये मोहल्ले के छुटपुट गुंडे ही आगे जाकर खूंखार अपराधी बन बैठते है ..इन्हें शह देने वाले हम सब है ...हम सहते है ...सहते चले जाते है ...इतना की कोई उफ्फ तक करने को भी तैयार नहीं ... मै सभी
देशवासियों से अनुरोध करूंगा ऐसे लोगो का सामना संगठित होकर करे . ये
चुप्पी बहुत भरी पड़ सकती है  ...समस्त पत्रकार बन्धुओं से भी अनुरोध है
की लोगो की इन समस्याओ को भी पूरी ईमानदारी के साथ प्रकाशित करे ताकि एक सभ्य समाज सुसंगठित हो सके, सुरक्षित हो सके .... जय भारत जय जगत
# सत्येन्द्र कात्यायन ] खतौली

अकविता

  https://youtu.be/M_txJ7Q8f1A